मैं एक ऐसी तस्वीर खींचना चाहता हूं..
तेरी हर मुस्कुराहट को समेटना चाहता हूं..
उगते सूरज से रंग बदलते आसमान को छूना चाहता हूं..
ढलते सूरज को देख, बेहक्ते समंदर में कूदना चाहता हूं..
एक बीज के अंकुरित होने से लेकर उसके वृक्ष को फूलों से लदे देखना चाहता हूं..
किसी नन्हे बच्चे की मासूम शरारत और उसकी हंसी को संजो के रखना चाहता हूं..
किसी मां की प्यार की गहराई में डूबना चाहता हूं..
कई बेजुबान जानवरों की खामोशी को सुनना चाहता हूं..
किसी कलाकार की कला के ज़रिए उसके मन में झकना चाहता हूं..
अपने बीते लम्हों को फिर से जीना चाहता हूं..
उन लम्हों को जिसमें में कभी मैं था ही नहीं उनका हिस्सा होना चाहता हूं..
इस जिंदगी की कई सारी अच्छाइयों को जीना चाहता हूं..
मैं एक ढलते सूरज की तस्वीर लेते अपनी परछाई की तस्वीर को देखना चाहता हूं..
मैं एक ऐसी तस्वीर खींचना चाहता हूं..
- ek Chitrakar








